शमा जलाए रखना जब तक कि मैं न आऊं
ख़ुद को बचाए रखना जब तक कि मैं न आऊं
ये वक़्त-ए-इम्तेहां है सब्र-ओ-क़रार-ओ-दिल का
आंसू छुपाए रखना जब तक कि मैं न आऊं
हम तुम मिलेंगे ऐसे जैसे जुदा नहीं थे
सांसे बचाए रखना जब तक कि मैं न आऊं
-सईद राही
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ये वक़्त-ए-इम्तेहां है सब्र-ओ-क़रार-ओ-दिल का
आंसू छुपाए रखना जब तक कि मैं न आऊं
हम तुम मिलेंगे ऐसे जैसे जुदा नहीं थे
सांसे बचाए रखना जब तक कि मैं न आऊं
-सईद राही
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One response to “शमा जलाए रखना …”
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