कानपुर का चमड़ा अब दिख रहा है ज़ारा में! घर वाली फीलिंग, भाई!
अरे भाई लोग! क्या बताएं… आज तो दिल गार्डन-गार्डन हो गया! मतलब, ये सोचकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं कि अपना कानपुर का चमड़ा… अपना वही जाजमऊ की टेनरियों वाला चमड़ा… शानदार जैकेट और फैशन एक्सेसरीज के रूप में यूरोप के हर बड़े स्टोर और ब्रांडों में दिख रहा है..
यादें ताज़ा हो गईं…
यार, तुम लोगों को क्या बताएं… मेरा तो कनेक्शन ही अलग है इससे. मैंने तो उन टेनरियों के लिए आईटी सिस्टम डिजाइन किए हैं. मतलब, वो चमड़ा कैसे बनता है, कैसे प्रोसेस होता है… सब अपनी आँखों से देखा है… और फिर जब वही चमड़ा मैंने ज़ारा में देखा… अरे भाई, घर वाली फीलिंग आई! एकदम से… दिल ने कहा, “ये तो अपना है!”
ये तो अपनी मिट्टी की खुशबू है!
विदेश में जाकर… जब अपने शहर की कोई चीज़ दिख जाए ना… तो दिल में एक अलग ही खुशी होती है. जैसे, कहीं दूर जाकर अपनी मिट्टी की खुशबू मिल जाए. और जब वो चीज़ इतनी बड़ी ब्रांड में दिखे… तो गर्व से छाती चौड़ी हो जाती है!
कानपुरिया होने का यही तो मजा है… हम अपनी चीज़ों को दुनिया में छाते हुए देखते हैं… और फिर कहते हैं, “देखा, अपना कानपुर भी किसी से कम नहीं!”
बस यही कहना था… मन बहुत खुश है… इसलिए सोचा, तुम लोगों से भी शेयर कर लूं! बाकी सब ठीक-ठाक?
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