ज़िन्दगी की रेस में ब्रेक लगाओ, सुकून पाओ! ☕️🏃♀️💨
कभी-कभी… ऐसा लगता है ना, जैसे हम सब एक रेस में दौड़ रहे हैं… बिना ये जाने कि मंज़िल क्या है? बस भागे जा रहे हैं… आगे निकलने की होड़ में… खुद को ही पीछे छोड़ जाते हैं।
आज जब मैंने ये गरम-गरम कॉफ़ी का मग उठाया… और खिड़की से बाहर देखा… तो एक अजीब सा एहसास हुआ…
दुनिया तो अपनी ही रफ़्तार से चल रही है… पेड़ वैसे ही हिल रहे हैं… बच्चे वैसे ही खेल रहे हैं… पंछी वैसे ही चहचहा रहे हैं…
लेकिन मेरे अंदर… एक अजीब सी शांति छा गई… जैसे सब कुछ थम सा गया हो…
भागदौड़ भरी ज़िंदगी…
हम हर रोज़ भागते हैं… नौकरी के लिए… पैसे के लिए… नाम के लिए… और इस भागदौड़ में… हम अक्सर भूल जाते हैं कि हम जी किसके लिए रहे हैं?
क्या ये ज़रूरी है कि हर वक़्त भागते ही रहें? क्या हम थोड़ा रुक नहीं सकते? क्या हम थोड़ा सुकून नहीं पा सकते?
थोड़ा ठहरना भी ज़रूरी है…
मुझे लगता है… ज़िंदगी को समझने के लिए… थोड़ा ठहरना भी ज़रूरी है…
कभी-कभी… हमें अपनी रफ़्तार धीमी करनी चाहिए… अपने आसपास की खूबसूरती को देखना चाहिए… अपने दोस्तों और परिवार के साथ वक़्त बिताना चाहिए… और सबसे ज़रूरी… खुद के साथ वक़्त बिताना चाहिए…
ये कॉफ़ी… ये सुकून… ये ठहराव… ये सब हमें याद दिलाते हैं कि ज़िंदगी सिर्फ़ भागने का नाम नहीं है…
ज़िंदगी तो जीने का नाम है… हर पल को महसूस करने का नाम है…
तो अगली बार जब आपको लगे कि आप बहुत तेज़ भाग रहे हैं… तो थोड़ा रुकिए… एक गहरी सांस लीजिए… और अपने अंदर के सुकून को महसूस कीजिए…
आप देखेंगे… ज़िंदगी कितनी खूबसूरत है!
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