Month: July 2005
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पसीने पसीने हुई जा रहे हो…
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पसीने पसीने हुई जा रहे हो ये बोलो कहां से चले आ रहे हो हमें सब्र करने को…
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दोस्त बन बन के मिले…
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दोस्त बन बन के मिले मुझको मिटानेवाले मैं ने देखे हैं कई रंग बलनेवाले तुमने चुप रहकर सितम…
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कैसे सुकून पाऊ….
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कैसे सुकून पाऊं तुझे देखने के बाद अब क्या ग़़जल सुनाऊं तुझे देखने के बाद आवाज़ दे रही…
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देख लो ख्व़ाब मगर….
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देख लो ख्व़ाब मगर ख्व़ाब का चर्चा न करो लोग जल जायेंगे सूरज की तमन्ना न करो वक़्त…
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चलो बांट लेते हैं अपनी सज़ाए
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चलो बांट लेते हैं अपनी सज़ाएं ना तुम याद आओ ना हम याद आएं सभी ने लगाया है…
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