इनसे मिलिये,
नामःसफीकुल विश्वास
कामः अरे छोड़िये काम को,
बेचारे के सारे काम धरे के धरे रह गये. अब आप ही बताइये ये दुःखी ना हो तो क्या हो, बेचारा बड़े अरमानों के ममता बनर्जी की तृणमूल कान्ग्रेस के बैनर तले पश्चिम बंगाल के २४ परगना जिले के बादुड़िया नगरपालिका के चुनाव मे चुनाव लड़ा था, बेचारे को एक भी वोट नही मिला. ये तो एक रिकार्ड बन गया. उसका अपना वोट तो खैर दूसरे वार्ड मे था,इसलिये वो तो मिलने का सवाल ही नही था, लेकिन तृणमूल कांग्रेस की तो मिट्टी पलीत हो ही गयी ना. क्यों ममता जी, ये क्या हो रहा है? क्या इसे राज्य मे आगामी विधानसभा चुनावों के नतीजों का सैम्पल माना जाय?
बेचारे तृणमूल कांग्रेस वाले मुँह छिपाये घूम रहे है और सफीकुल भाई? अरे वो क्या करेंगे, उनके आँसू थमे तभी तो कोई बात करें ना.अरे रामबिलास पासवान जी, आप सोच मे क्यों पड़ गये? घबराइये नही,अभी तो बिहार चुनाव दूर है.
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2 responses to “सबसे ज्यादा दुःखी उम्मीदवार”
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