ज़िंदगी की आपाधापी? छोड़ो! ये नदी सिखाएगी सुकून का असली मतलब!
यार, सच बताऊँ…कभी-कभी ये ज़िंदगी इतनी भागदौड़ भरी लगती है ना…कि बस मन करता है सब छोड़ छाड़ के कहीं दूर निकल जाऊँ…कहीं ऐसी जगह जहाँ बस शांति हो… सुकून हो…
और पता है, ऐसे में मुझे क्या सबसे अच्छा लगता है? नदी… हाँ, वही नदी जो पहाड़ों के बीच से कलकल करती हुई बहती है…
ये लहरें, ये हवा…क्या कहें!
कभी गए हो नदी के किनारे? वो जो ठंडी-ठंडी हवा चलती है ना…और पानी की लहरें जो पैरों को छूकर गुज़र जाती हैं…अरे, वो एहसास ही अलग होता है! ऐसा लगता है जैसे सारी थकान उतर गई हो…
आज मैं वहीं गया था…पहाड़ की गोद में बहती एक नदी के पास…और पता है क्या महसूस हुआ? कि यार, मंज़िल तो अपनी जगह है…लेकिन ये जो रास्ता है ना…ये जो सफ़र है…ये उससे भी ज़्यादा खूबसूरत है!
सुकून की असली दौलत
लाइफ-जैकेट पहनो, हाथों में चप्पू लो…और बस बह चलो…लहरों के साथ… सच कह रहा हूँ…आधे टेंशन तो किनारे पर ही छूट जाते हैं… फिर बस तुम होते हो… और वो नदी…और वो सुकून… वही तो असली दौलत है…
ये जो हम दिन रात भागते रहते हैं ना…पैसे के पीछे, शोहरत के पीछे…कभी-कभी रुक कर सोचना चाहिए…कि असली खुशी किसमें है…और मैं बताऊँ? वो सुकून में है…उस शांति में है… जो हमें प्रकृति के करीब रहने से मिलती है…
तो अगली बार जब ज़िंदगी तुम्हें बहुत परेशान करे ना…तो बस निकल जाना…किसी नदी के किनारे…देखना…सब ठीक हो जाएगा…
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